16.7.08

घुरदौडी की वादियों में



जीवन के वो चार वर्ष
स्वर्णिम वर्ष थे मेरे,
वो वक्त बीता था
घुरदौडी की वादियों में।

कुछ आज भी साथ है
कुछ की यादें दिलों में
मित्र वो जिनके साथ रहे हम
घुरदौडी की वादियों में।

कहीं कुछ कम
कहीं पूरे संसाधनों में
हमने ज्ञान प्राप्त किया
घुरदौडी की वादियों में।

आज जो भी हैं जहाँ भी हैं
उस ज्ञान की बदौलत,
जो हमने सीखा
घुरदौडी की वादियों में।

जैसे भी, जहाँ भी रहूँगा,
कभी भूल न पाऊंगा
जो वक्त बिताया
घुरदौडी की वादियों में।

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